Rahul Gandhi के बारे में सोशल मीडिया में जो पढ़ा वो ही सच है?

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‘मुझे अपनी छवि की परवाह नहीं है। मैंने, राहुल गांधी को मार डाला। राहुल गांधी आपके दिमाग में हैं। वो मेरे दिमाग में बिल्कुल नहीं हैं। वो जा चुके हैं। मुझे, छवि में कोई दिलचस्पी नहीं है। आप, मुझे जो चाहें छवि दे सकते हैं – अच्छी या बुरी’

-         ये लाइनें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तब कहीं थी जब वो भारत जोड़ो यात्रा पर थे। आए दिन किसी न किसी वजह से राहुल गांधी चर्चा में रहते है। उनकी छवि को लेकर लोग बात करते है। सोशल मीडिया में वो खूब वायरल होते हैँ। एक पॉलिटिशियन से अलग राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से किस तरह के इंसान है इसके बारे में लोग कम जानते हैं। और जो जानते भी वो उनको सोशल मीडिया के जरिये जानते है जिसमें बहुत सारी बातें गलत भी हैं।  

आज कहानी राहुल गांधी की। जिन सुरक्षाकर्मियों के साथ वो खेलते थे उन्हीं सुरक्षाकर्मियों ने उनकी दादी की हत्या कर दी। जिनके पिता को बम से उड़ा दिया गया। उनकी जान को खतरा था । तो पांच साल घर में ही रहकर पढ़ना पड़ा।

जवाहरलाल नेहरू ने आजादी की जंग लड़ी, पहले प्रधानमंत्री बने। उनकी बेटी इंदिरा गांधी 20वीं सदी की सबसे शक्तिशाली शख्सियत के तौर पर उभरीं। इंदिरा के बेटे राजीव गांधी ने कई प्रयोग किए। कांग्रेस में सबसे लंबे वक्त तक अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी भी दमदार व्यक्तित्व को लेकर जानी जाती हैं। साल 2004 में पॉलिटिक्स में एंट्री लेने वाले राजीव और सोनिया के बेटे राहुल गांधी की सोच और काम करने का तरीका कुछ अलग सा है। जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं तब

19 जून, साल 1970 को दिल्ली में राहुल गांधी का जन्म हुआ। राहुल ने दिल्ली के मॉर्डन स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की। साल 1982 में वो दून स्कूल चले गए। 1983 में सुरक्षा कारणों के चलते वापस दिल्ली आ गए। राहुल बचपन में घर से बाहर न जा सकते थे और न ही दूसरे बच्चे उनके घर आ सकते थे। सुरक्षाकर्मियों के ही साथ खेलते।

साल 1984 को उनकी दादी इंदिरा गांधी की उन्हीं सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी। इस घटना का राहुल पर बहुत बुरा असर पड़ा। इसके बाद पांच साल तक वो घर में ही पढ़े।

राहुल गांधी ने स्विमिंग, बॉक्सिंग, पैराग्लाइडिंग और शूटिंग की ट्रेनिंग ली। 1989 में स्पोर्ट्स कोटे से ही दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में हिस्ट्री ऑनर्स में एडमिशन मिला। वो हमेशा सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहते, इसलिए उन्हें आम इंसान की तरह जीने का मौका नहीं मिला। वो अपना जीवन जीना चाहते थे, इसलिए साल 1990 में वो कालेज की पढ़ाई आधे में छोड़कर विदेश चले गए और किसी दूसरे नाम से एडमिशन ले लिया।

साल 1994 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के रोलिंस कॉलेज, फ्लोरिडा, अमेरिका से आर्टस में ग्रेजुएशन किया। साल 1995 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से डेवलपमेंट स्टडीज में एमफिल की डिग्री ली।

राहुल गांधी ने एक बार कहा था, ‘विदेश में पढ़ाई करने के दौरान मैंने जोखिम उठाया। अपने सुरक्षा गार्ड से निजात पा ली। ताकि, मैं आम जिंदगी जी सकूं।’

21 मई, 1991। राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। 21 साल की उम्र अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उनको बस इतना पता था कि उसके पिता राजीव के शरीर के कुछ टुकड़े जुटाए गए हैं। शव की पहचान जूतों से हो सकी। इस घटना से सिर्फ दो महीने पहले अपनी मां सोनिया से राहुल ने कहा था ‘पिताजी की सुरक्षा व्यवस्था सही नहीं है। अगर, ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही कुछ बुरा हो सकता है।

लंदन में मैनेजमेंट गुरु माइकल पोर्टर की कंपनी मॉनिटर ग्रुप के साथ तीन साल तक काम करने वाले राहुल गांधी साल 2002 के अंत में भारत लौटे। मुंबई में एक इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग फर्म, बैकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई। लेकिन बाद में ये बंद हो गई।

राहुल गांधी साल 2003 से कांग्रेस की मीटिंग में आने जाने लगे। सद्भावना यात्रा पर बहन प्रियंका गांधी के साथ पाकिस्तान गए। मार्च 2004 में लोकसभा चुनाव का ऐलान हुआ, तो राहुल गांधी ने सियासत में आने का ऐलान कर दिया। अमेठी से चुनाव लड़ा और एक लाख वोट से जीते। सरकार या पार्टी में कोई ओहदा नहीं लिया और अपना सारा ध्यान आम लोगों के मुद्दों पर लगाया। साल 2009 और साल 2014 में वो फिर से सांसद बने। यहां सब तो ठीक था लेकिन इसके बाद से उनकी छवि सोशल मीडिया में खराब होने लगी।

इसके पीछे शायद वजह ये हो सकती है जब उन्हें साल 2013 में कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया। इससे पहले कांग्रेस में उपाध्यक्ष का पद नहीं होता था, लेकिन पार्टी में राहुल गांधी महत्व बढ़ाने और उन्हें सोनिया गांधी का सबसे खास सहयोगी बनाने के लिए ये किया गया। साल 2017 में कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनाया गया। वंशवाद का मुद्दा विपक्षी पार्टियों ने खूब उठाया।

इसके बाद भी राजनीति की विरासत को संभालने वाला ये युवा नेता युवाओं और बच्चों के साथ बुजुर्गों का भी चहेता है। किसी से भी घुलमिल जाना। किसी के साथ खा लेना, चारपाई पर सो जाना, जिंदगी जीने के ये अंदाज 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान देखे गए। जो उनकी जहनीयत को अलग बनात है। एक सर्वे में विश्वसनीयता के मामले में दुनिया के बड़े नेताओं में राहुल गांधी को तीसरा दर्जा मिला है।

जिस फैमिली ने देश को तीन प्रधानमंत्री दिए उनकी अगली पीढ़ी के इस युवा नेता पर काफी सारी जिम्मेदारी है।

एक पत्रिका में छपे में इंटरव्यू के मुताबिक भारत रत्न और नोबेल अवार्ड से सम्मानित अर्थशास्त्री डॉक्टर अमर्त्य सेन ने राहुल को 'काबिल' बताते हुए कहा था कि राहुल को भारत के नुकसान को लेकर काफी चिंताएं हैं और वो बदलाव चाहते हैं।

डॉ सेन ने कहा था कि ‘मैं उनसे ट्रिनिटी कॉलेज में मिला था। तब मैंने उनके साथ पूरा दिन गुजारा था। मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ। वो जो करने की योजना बना रहे थे। हमने इस पर बात की। उस वक्त राजनीति उनकी योजना में नहीं थी। मेरा मानना है कि, ये उनका वास्तविक विचार था और बाद में उन्होंने इसे बदल दिया। ये मेरे लिए बहुत साफ था कि, वो भारत के विकास के लिए बेहद प्रतिबद्ध हैं।’

राहुल गांधी को आसमान में उड़ना अच्छा लगता है। उन्होंने हवाई जहाज उड़ाना सीखा। वो रोज दस किलोमीटर तक जॉगिंग करते हैं। किताबें भी पढ़ते है। वो खाने के शौकीन हैं। खासकर पुरानी दिल्ली का स्ट्रीट फूड। राहुल गांधी को खामोश शामें बहुत पसंद हैं। इसके साथ ही उन्हें दुनिया की चकाचौंध भी खूब लुभाती है। वो रिश्तों को बहुत अहमियत देते इसलिए राहुल गांधी को लोग प्यार से आरजी भी बुलाते हैं।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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