Ram Jethmalani की Story किसी Bollywood Film से कम नहीं

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देश के सबसे चर्चित क्रिमिनल लायर राम जेठमलानी का नाता अक्सर विवादों से रहा। जहां मौका मिलता उस पॉलिटिकल पार्टी की तरफ हो लेते। किसी को कुछ भी कह देते।

 

एक बार जानीं मानीं लेखिका शोभा डे ने एक इंटरव्यू में सवाल पूछा कि "भगवान और शैतान में से अगर किसी एक पर भरोसा करना पड़े तो किस पर करेंगे।"

तब इन्होंने जवाब दिया कि "मैं भगवान से ज्यादा शैतान पर भरोसा करूंगा।"

ये जवाब उन्होंने दिया था जिनका नाता अक्सर विवादों से रहा। जहां मौका मिलता उस पॉलिटिकल पार्टी की तरफ हो लेते। किसी को कुछ भी कह देते। इसके बाद भी किसी का कोई भी कानूनी काम पड़ता, तो वो इन्हीं के पास आता।

आज कहानी देश के सबसे चर्चित क्रिमिनल लायर राम जेठमलानी की। जिन्होंने एक रुपये भी फीस ली और देश के सबसे महंगे वकील भी बने। इनके पास 70 सालों का अनुभव था।

सिर्फ इनता ही नहीं जिनकी जिंदगी में झांकेंगे तो संघर्ष है, कुछ पाने की जिद है, प्यार है, एक नहीं दो-दो शादी है, बंटवारे का दंश है, हार भी है और जीत भी है।

सिंध के शिकारपुर गांव में 14 सितंबर साल 1923 को राम जेठमलानी का जन्म हुआ। राम जेठमलानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि

‘मेरे जन्म के वक्त मेरी मां पार्वती की उम्र महज 14 साल थी। इस लिहाज से मैं और मेरी मां एक साथ बढ़े हुए।’ 

उन्होंने बताया था कि ‘शुरुआती पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल से की। परिवार चाहता था कि मैं इंजीनियर बनूंलेकिन मैं वकील बनना चाहता था। क्योंकि पिता भूलचंद जेठमलानी और दादा गुरमुखदास जेठमलानी दोनों वकील थे।’

पढ़ाई में होनहार राम जेठमलानी ने दो-दो क्लास एक साल में पास की। 13 साल की उम्र में 10वीं और 17 साल की उम्र में एलएलबी की। 18 साल की उम्र में प्रैक्टिस करने इजाजत भी मिल गई। फिर कराची से एलएलएम किया और एक 'लॉ फर्म' भी बना ली।

इन्होंने एक नहीं दो शादी की। अपने एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि ‘प्यार तो स्कूल में एक लड़की से हुआ पर बात नहीं बनी। इसके बाद साल 1941 में 18 साल की उम्र में दुर्गा देवी से शादी हो गई। फिर साल 1947 को 24 साल की उम्र में साथी वकील रत्ना साहनी से दूसरी शादी की।’

दोनों पत्नियां, चार बच्चे एक साथ खुशी-खुशी रहते। प्रैक्टिस भी बढ़िया चल रही थी। पर देश का बंटवारा हो गया। जगह-जगह दंगे भड़के थे। दोस्तों की सलाह पर सब कुछ छोड़कर साल 1948 में पाकिस्तान से भारत आ गए।

रहने का ठिकाना बना मुंबई का रिफ्यूजी कैंप और रोजी-रोटी के लिए मुंबई गवर्नमेंट लॉ कालेज में पढ़ाने लगे। प्रैक्टिस भी शुरू की। वक्त गुजरा तो एक चेंबर भी बना लिया।

वो पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के हक के लिए मोरारजी देसाई की सरकार के बनाए कानून के खिलाफ लड़े और जीते। ये आगाज था और यही जज्बा ताउम्र रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक..... राम जेठमलानी ने अपना पहला केस सिर्फ एक रुपये की फीस में लड़ा। फिर एक वक्त आया जब वो देश के सबसे महंगे वकील बनें।

अगले 70 सालों तक बड़े-बड़े मामलों में अभियुक्तों की पैरवी की।

चाहे जब नेवी अफसर मानेकशॉ नानावटी को बचाया हो या फिर अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की पैरवी की। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के हत्यारोपियों की तरफ से केस लड़ा। स्टॉक मार्केट के घोटाले के आरोपी हर्षद मेहता या फिर 2जी घोटाले के आरोपी कनिमोझी हो दोनों की पैरवी की। जेसिका लाल हत्या के अभियुक्तों का केस लड़ा। संसद हमले में अफजल गुरु हो या फिर रेप केस में आसाराम हो इन दोनों को बचाने की कोशिश की।

अमित शाह, लालू यादव, जयललिता, बीएस येदियुरप्पा जैसे बड़े से बड़े नेता हो या फिर योग गुरु बाबा रामदेव, बिजनेसमैन सुब्रत राय जब भी फंसे राम जेठमलानी के पास ही गए।

इन केसों की वजह से इनकी आलोचना भी हुई। पर वो कहते बतौर वकील उनका ये काम है।

राम जेठमलानी एक अच्छे वकील तो थे साथ में पॉलीटिशियन भी बने। राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी लाये क्योंकि दोनों सिंध से थे।

साल 1971 में निर्दलीय लोकसभा का चुनाव लड़ा। शिवसेना और जनसंघ ने सपोर्ट किया पर हार मिली।

फिर कनाडा भागना पड़ा। दरअसल आपातकाल के वक्त इन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आलोचना की तो गैर जमानती वारंट जारी हुआ। 10 महीने कनाडा में रहते हुए मुंबई की नॉर्थ-वेस्ट सीट से साल 1977 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते। इमरजेंसी खत्म हुई, भारत लौटे।

साल 1980 में भी लोकसभा चुनाव जीते। पर 1984 में कांग्रेस के सुनील दत्त से हार मिली। साल 1988 में राज्यसभा सदस्य चुने गए। 1996 से 1999 तक अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में कानून मंत्री रहे और अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ से चुनाव भी लड़े।

राष्ट्रपति के चुनाव में भी उम्मीदवारी घोषित की। इनके सभी पार्टी के नेताओं से अच्छे रिश्ते थे। बीजेपी से निष्कासित हुए तो आरजेडी से हाथ मिला लिया। इन वजहों से अवसरवादी होने के आरोप भी लगे।

राम जेठमलानी निजी जिंदगी में सबके दोस्त थे। बेबाकी और खुलेपन से जीते। सिंगल मॉल्ट स्कॉच पीने के बेहद शौकिन थे।

एक बार पुलिस ने एक आदमी को 12 बोतल स्कॉच के साथ पकड़ा। वो राम जेठमलानी के पास गया। स्कॉच के शौकीन जेठमलानी केस लड़ने को तैयार हो गए। जेठमलानी ने कहाजज साहब, ये आदमी कोई ऐसी वैसी नहीं, सबसे बढ़िया स्कॉच देता है।”

स्कॉच सम्गलर को रिहाई मिल गई। वजह थी कि  जज साहब खुद स्कॉच पीते थे और ये बात राम जेठमलानी को मालूम थी।

राम जेठमलानी मर्सिजिड बेंज चलना और बैंडमिंटन खेलना पसंद करते। जिंदगी के आखिरी वक्त तक काम करते-करते 08 सितंबर साल 2019 को वो 95 साल की उम्र में दुनिया छोड़कर चले गए।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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