Reema Lagoo : फिल्मी करियर बढ़ा तो छोड़ दी बैंक की नौकरी

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जब श्रीदेवी ने फिल्म में सीन्स कटवा दिए

साल 1993। संजय दत्त और श्रीदेवी की फिल्म गुमराह रिलीज हु। जिसे मुकेश भट्ट ने डायरेक्ट और यश जौहर ने प्रोड्यूस किया। ये बात तब की जब फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी थी और एडिटिंग का काम चल रहा था। इस दौरान एक्ट्रेस श्रीदेवी की नजर उसी फिल्म में काम कर रहीं एक एक्ट्रेस की परफॉर्मेंस पर पड़ी। जो फिल्म में उनकी मां किरदार निभा रही थीं। उस एक्ट्रेस की एक्टिंग देखकर श्रीदेवी इतना घबरा गईं कि उन्हें ये लगने लगा कि फिल्म में उनकी एक्टिंग कहीं उस एक्ट्रेस की एक्टिंग से ओवरशैडो न हो जाए। श्रीदेवी ने प्रोड्यूसर यश जौहर से गुजारिश की थी कि वो फिल्म में उन एक्ट्रेस के कई सीन्स काट दें। यश जौहर नहीं चाहते थे फिर भी वो श्रीदेवी की जिद की आगे झुके और उन्हें उस एक्ट्रेस के कई सीन्स फिल्म से हटवाने पड़े।

और मिला बॉलीवुड की मार्डन मां का टैग

यश जौहर को इस बात का मलाल रहा। फिर उन्होंने ये फैसला कि उनकी प्रोडक्शन में बनी लगभग सभी फिल्मों में वो ही एक्टेस मां का रोल निभाएंगी। जिसके बाद प्रोडक्शन में बनी साल 1998 की ‘डुप्लीकेट और कुछ-कुछ होता है और साल 2004 की कल हो ना हो। उनकी एक्टिंग का दम ही थ कि ऐसी कई सारी फिल्मों में मां के किरदार किए तो उन्हें इंडस्ट्री की मां का टैग मिला। आज कहानी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस रीमा लागू की। जिन्होंने 10 साल तक बैंक में नौकरी करने के साथ ही पिल्मों में काम किया। करीब 75 फिल्म और 10 से ज्यादा टीवी सीरियल किए। एक्टिंग के इसी सफर में उन्हें कैसे एक शख्स से प्यार हुआशादी की पर क्यों कुछ वक्त बाद ही उनका पति से अलगाव हो गया और फिर उन्होंने सारी जिंदगी अकेले ही अपनी बेटी की परवरिश की।

बैंक की नौकरी के साथ ही की फिल्में

साल 1969 की अपराध और साल 1975 की ‘जुंझजैसी मराठी फिल्मों में काम करना वाली एक्ट्रेस ंदाकिनी भदभदे के घर 21 जून साल 1958 को एक बेटी का जन्म हुआ। नाम रखा नयन भदभदे उर्फ रीमा लागू। मां को ही देखकर रीमा लागू का रुझान भी एक्टिंग की तरफ गया और साल 1964 की मराठी फिल्म मास्टरजी में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया। फिर मराठी स्टेज शुरू किया। एक्टिंग के साथ वो पढ़ाई में भी अच्छी थीं। साल 1979 में 21 साल की उम्र में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी लग भी गई। पर एक्टिंग करनी नहीं छोड़ी वो इंटर बैंक कल्चरल इवेंट में पार्टिसिपेट किया करतीं। साल 1979 की मराठी फिल्म में सिंहासन से फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू किया। फिर साल 1980 की हिंदी फिल्म कलयुग और साल 1985 का टीवी सीरियल खानदान में काम करने का मौका मिला। गुजरते वक्त के साथ कामयाबी मिली तो 10 साल बाद बैंक की नौकरी करने के बाद साल 1989 में नौकरी छोड़ दी।

प्यार, शादी फिर अलगाव

साल 1976 में उनकी मुलाकात विवेक लागू से हुई। प्यार हुआ तो दोनों ने साल 1978 में शादी कर ली। पर ये रिश्ता ज्यादा वक्त तक टिक न सका। दोनों के बीच दूरियां आई तो तलाक ले लिया। शादी टूटने के बाद जैसे-तैसे खुद को संभाला। दूसरी शादी नहीं की और पूरी जिंदगी अपनी बेटी मृण्मयी लागू की अकेली ही जिम्मेदारी उठाई। मृण्मयी लागू एक एक्ट्रेस और थिएटर डायरेक्टर हैं।

11 फिल्मों में बनी सलमान खान की मां

बॉलीवुड में हिंदी फिल्म में उन्हें बड़ी पहचान साल 1988 में आई फिल्म कयामत से कयामत तक से मिलीजिसमें उन्होंने जूही चावला की मां का रोल निभाया। साल 1989 की फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान खान की मां के रोल में देखा गया। रीमा लागू ने सलमान खान की 11 फिल्मों में उनकी मां को रोल निभाया है। साल 1999 की फिल्म वास्तव में जब रीमा लागू ने गैंगस्टर का रोल कर रहे संजय दत्त की मां का रोल किया उनके काम को बहुत सराहना मिली।

निधन के एक दिन पहले तक किया काम

मैंने प्यार किया’, ‘आशिकी’, ‘हम आपके हैं कौन और वास्तव के लिए 4 बार बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नॉमिनेशन और श्रीमान-श्रीमती और तू-तू मैं-मैं जैसे शोज के लिए बेस्ट एक्ट्रेस इन कॉमिक रोल के लिए इंडियन टेली अवार्ड पाने वाली रीमा लागू साल 2017 की फिल्म नामकरण की शूटिंग कर रहीं थी। काम खत्म करने के बाद घर आई तो रात में उनके सीने में दर्द शुरू हुआ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 18 मई साल 2017 को 58 साल की उम्र में रीमा लागू ने दुनिया से अलविदा कह दिया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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