Shafi Inamdar : बड़े से बड़े हीरो पर भी भारी पड़ जाते

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शफी इनामदार ने उम्र के 37वें पड़ाव पर फिल्मों में काम करना शुरू किया। वो कैरेक्टर रोल करते, पर एक्टिंग ऐसी की बड़े से बड़े हीरो पर भी भारी पड़ जाते। ऐसे मंझे हुए कलाकार जिनके एक टीवी सीरियल ने घर-घर पहचान बनाई।

'चेहरा गुलाबीनजरें शराबी

ये लाइनें सुनकर, हमें साल 1995 की फिल्म 'अकेले हम अकेले तुम' का वो सीन याद आ जाता है जहां एक्टर आमिर खान एक गाने की रिकॉर्डिंग करते हैं। इस सीन में आमिर खान ने लाजवाब एक्टिंग की थी। पर इसी सीन में ही एक्टिंग के मामले में आमिर खान को उस एक्टर ने टक्कर दी थी जो म्यूजिक डायरेक्टर कौशिक का रोल निभा थे। 

थियेटर में कमाया नाम

वो एक्टर, जिन्होंने उम्र के 37वें पड़ाव पर फिल्मों में काम करना शुरू किया। वो कैरेक्टर रोल करते, पर एक्टिंग ऐसी की बड़े से बड़े हीरो पर भी भारी पड़ जाते। ऐसे मंझे हुए कलाकार जिनके एक टीवी सीरियल ने घर-घर पहचान बनाई। बड़े और छोटे पर्दे में जितना नाम कमाया उससे भी कहीं ज्यादा थियेटर में फेमस हुए। 

कॉमिक टाइमिंग बेहतरीन और संजीदा रोल में भी सबसे जुदा

आज कहानी शफी इनामदार की, जिनकी रील की जिंदगी बेहद शानदार और रियल लाइफ में सबकुछ ठीक। पर अचानक एक घटना से सब खत्म हो गया। ये उनकी जिंदगी का आखिरी दिन था। उनकी पत्नी जो एक फेमस थियेटर आर्टिस्ट थीं उनकी भी मौत से सभी को हैरानी हुई।

'मुझे एक एक्टर बनाना है।' 

23 अक्टूबरसाल 1945, महाराष्ट्र के रत्नागिरी में एक मुस्लिम फैमिली में शफी इनामदार का जन्म हुआ। शुरुआती पढ़ाई करने के बाद साल 1963 में बीएससी किया और कॉलेज के दिनों में ही तय किया 'मुझे एक एक्टर बनाना है।' दरअसलथियेटर में दिलचस्पी थी। कॉलेज खत्म हुआ तो गुजराती थियेटर से बतौर एक्टर-डायरेक्टर करियर की शुरुआत की। ये 70 का दशक था जब पृथ्वी राज कपूर के पृथ्वी थिएटर की बागडोर उनके बेटे एक्टर शशि कपूर ने संभाल ली थी। शफी इनामदार ने पृथ्वी थियेटर से जुड़कर कई नाटकों को डायरेक्ट किए। इस दौरान एक्टर शशि कपूर उनके अच्छे दोस्त भी बने। इसके बाद वो इंडियन नेशनल थियेटर और इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसियशन से भी जुड़े। जहां बलराज साहनीउत्पल दत्त जैसे एक्टर्स से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं।

जब बॉलीवुड की तरफ बढ़ाए कदम

साल 1973 से 1978। लगभग पांच सालों में उन्होंने हिंदीगुजरातीमराठी और इंग्लिश भाषा में करीब 30 नाटक डायरेक्ट किए। साल 1982 – उम्र 37 साल की हो चुकी थी तब शफी इनामदार ने अपना प्रोडक्शन हाउस खोलाथिएटर ग्रुप 'हमकी नींव रखी और अपने कदम बॉलीवुड की तरफ भी बढ़ाए। दरअसल शफी इनामदार के दोस्त शशि कपूर अपने बैनर तले फिल्म 'विजेता' बना रहे थे। शफी इनामदार का फिल्म में छोटा पर अहम रोल थाउन्होंने अपनी एक्टिंग से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। फिर गुजरते वक्त के साथ अगले 15 सालों में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

जब शफी इनामदार घर-घर हो गए फेमस 

साल 1984, तब भी फिल्में शुक्रवार को रिलीज होती थीपर ऐसा कहा जाता है थियेटर के नाइट वाले शो में टिकट की बिक्री कम होती थी। वजह शुक्रवार की शाम को ही दूरदर्शन में एक टीवी सीरियल टेलीकास्ट होता था। जिसका नाम था - 'ये जो है जिंदगी'पॉपुलैरिटी ऐसी कि सभी अपना कामकाज छोड़कर इसे देखते। ये सीरियल इतना हिट हुआ कि करीब 61 एपिसोड तक चला। इसी सीरियल में उन्होंने कॉमन मैन रंजीत वर्मा का रोल निभाकर अपनी अलग जगह बनाई।

जब एक घटना ने सबकुछ किया खत्म

नाना पाटेकरऋषि कपूर और पूजा भट्ट स्टारर साल 1995 की हिट फिल्म 'हम दोनों' का डायरेक्शन शफी इनामदार ने किया था। शफी इनामदार ने फेमस थियेटर आर्टिस्ट और साल 2001, में इंडियन टेली अवार्ड से सम्मानित एक्ट्रेस भक्ति बर्वे से शादी की थी। ये वो वक्त था जब उनका करियर पीक पर था तभी एक घटना ने सब कुछ खत्म कर दिया। 13 मार्च साल 1996 इस इंडिया और श्रीलंका के बीच क्रिकेट वर्ल्ड कप था वो स्टेडियम में मैच देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक पड़ा। 50 साल की उम्र में शफी इनामदार ने दुनिया को अलविदा कह दिया। करीब पांच साल बाद 12 फरवरी साल 2001 को उनकी पत्नी वाइफ भक्ति बरवे की भी दर्दनाक मौत हुई। एक रोड एक्सीडेंट में उनकी जान चली गई थी।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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