Singer Asha Bhosle की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी है

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सिंगर आशा भोंसले ने जिंदगी जो पाया वो आसान नहीं था। कड़ा संघर्ष है, कुछ पाने की जिद है। जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव हैं। बचपन में पिता का निधन हो गया। घर से भागीं, 16 साल बड़े प्रेमी से शादी की, पर धोखा मिला।

ओ हसीना जुल्फों वाली..., ओ मेरे सोना रे..., इन आंखों की मस्ती के..., पिया तू अब तो आजा..., ये मेरा दिल..., जरा सा झूम लू..., राधा कैसे न जले..., चंदा मामा दूर के... ऐसे न जाने कितने गाने जिनकी आवाज से सजे हैं, उनका नाम संगीत की दुनिया में बेहद अदब से लिया जाता है।

ये वो सिंगर हैं जिन्होंने जिंदगी जो पाया वो आसान नहीं था। कड़ा संघर्ष है, कुछ पाने की जिद है। जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव हैं। बचपन में पिता का निधन हो गया। घर से भागीं, 16 साल बड़े प्रेमी से शादी की, पर धोखा मिला। फिर मोहब्बत की तो उसे पाने में 24 साल गए।

आज कहानी अपनी खूबसूरत आवाज की बदौलत करोड़ों दिलों पर राज करने वालीं आशा भोंसले की। जो आज 90 साल की उम्र में घर में बैठीं नहीं हैं। काम कर रहीं हैं। म्यूजिक में नहीं लोगों को खाने का स्वाद दे रहीं हैं। पूरी दुनिया में रेस्टोरेंट चेन चला रही हैं।

08 सितंबर, साल 1933 महाराष्ट्र के सांगली में दीनानाथ मंगेशकर और सेवंती मंगेशकर के घर आशा भोसले का जन्म हुआ। आशा भोंसले की तीन बहनें लता मंगेशकर, मीना मंगेशकर, उषा मंगेशकर और एक भाई हृदयनाथ मंगेशकर हैं।

पिता दीनानाथ मंगेशकर, थियेटर आर्टिस्ट और एक संगीतकार थे। इसलिए संगीत की तरफ रुझान सभी बच्चों पर भी गया। आशा भोसले जब नौ साल की हुई तो पिता का निधन हो गया। घर के आर्थिक हालात बिगड़े, पूरा परिवार मुंबई आ गया।

घर में सबसे बड़ी लता मंगेशकर थीं तो जिम्मेदारी भी उन्होंने उठाई। लता जी ने फिल्मों में गाना शुरू किया। पीछे से आशा भोंसले भी घर संभालना चाहती थीं। उन्होंने भी अपना करियर सिंगिग में देखा। साल 1948 की फिल्म ‘सावन आया’ का गाना ‘चुनरिया’ गाकर अपने सफर की शुरुआत की।

उस दौर में गीता दत्त, शमशाद बेगम, नूरजहां और लता मंगेशकर का बोलबाला था। आशा भोंसले को वो गानें मिले जो इन सभी ने गाने से मना कर दिया। पर इन्हीं गानों के बल पर आशा भोसले सुरों की मल्लिका बनीं।

दिग्गज म्यूजिक डायरेक्टर ओपी नैय्यर आशा भोसले की आवाज के मुरीद थे। जिन्होंने अपने संगीत पर आशा भोंसले को कई गाने का मौका दिया। आशा भोंसले का करियर चल पड़ा था।

सब कुछ ठीक था, पर अचानक जिंदगी में एक भूचाल आया। दरअसल, आशा भोसले लता मंगेशकर के पर्सनल सेक्रेटरी गणपतराव भोंसले के प्यार में पड़ीं।

घर वाले तैयार नहीं हुए तो 16 साल की आशा भोंसले और 31 साल के गणपतराव घर से भाग गए और साल 1949 में शादी कर ली। पर ये शादी 10 साल चली। आखिरकार रोज के झगड़े से तंग आकर आशा भोसले ने घर छोड़ दिया। ये वक्त मुश्किल भरा था। पर एक सहारा था संगीत का और इसी संगीत ने उनकी मुलाकात पंचम दा यानी आर डी बर्मन से करवाई।

साल 1956 ये वो वक्त था जब 23 साल की आशा भोसले ने इंडस्ट्री में अच्छी खासी पहचान बना ली थी। वहीं 14-15 साल के आरडी बर्मन की पहचान सिर्फ फेमस म्यूजिक डायरेक्टर सचिन देव बर्मन के बेटे और उनके असिस्टेंट के रूप में थी।  पिता सचिन देव बर्मन ने ही आशा भोसले और आरडी बर्मन की मुलाकात एक गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान करवाई थी। साल 1966 की फिल्म 'तीसरी मंजिल' के लिए आरडी बर्मन म्यूजिक दे रहे थे। फिल्म में आशा भोसले ने चार गाने रिकॉर्ड किए। फिल्म 'तीसरी मंजिल' से आरडी बर्मन को पहचान भी मिली और आशा भोसले भी।

‘आरडी बर्मन’ : द मैन द म्यूजिक किताब में अनुराधा भट्टाचार्या और बाला जी विठ्ठल लिखते हैं कि

जब 'तीसरी मंजिल' फिल्म के गाने रिकॉर्ड हो रहे थे। तब आशा भोसले का तलाक हो गया था। वहीं आर डी बर्मन की पहली शादी उनकी एक फैन रीता पटेल से हुई थी। लेकिन, वो भी रीता से अलग रह रहे थे।

पहली मोहब्बत से हारे आशा भोसले और आरडी बर्मन सारे गम भूल कर करीब आ रहे थे। कई साल बगैर शब्दों के ही उनके एहसास म्यूजिक की तरह रोमांस बनकर बहते रहे। ये दोस्ती गहरी होती गई। साल 1971 आरडी बर्मन का पहली पत्नी रीता पटेल से तलाक हो गया। इसके बाद आरडी बर्मन ने आशा भोसले को प्रपोज कर दिया। कहा कि

‘सिर्फ तुम हो जो सुर को समझ सकती हो। मुझे, तुम्हारी आवाज से प्यार है।’

आशा समझ गईं कि पंचम क्या कहना चाहते हैं और उन्होंने भी हां कह दी। पर शादी का रास्ता आसान नहीं था। आशा भोंसले आरडी बर्मन से छह साल बड़ी थी। जिस वजह से पंचम दा की मां मीरा रिश्ते के खिलाफ थी। लेकिन, पिता एसडी बर्मन को दिक्कत नहीं थी।

वक्त गुजरा साल 1974 में पिता एस डी बर्मन का निधन हो गया। इस सदमे से मां मीरा टूट सी गई, बीमार रहने लगी। पंचम ने कुछ सालों बाद अपनी मां से फिर से आशा भोसले से शादी के लिए कहा। इस बार वो मान गईं, वजह शायद पति एसडी बर्मन की अंतिम इच्छा रही होगी। 

साल 1956 में अपनी पहली मुलाकात के 24 साल बाद साल 1980 में पंचम दा और आशा भोसले की शादी हुई। पंचम और आशा का साथ 14 साल रहा। 4 जनवरी साल 1994 को पंचम दा का 54 साल की उम्र में निधन हो गया।

उनके निधन के बाद आशा भोंसले के पास पंचम की यादें थी उन्हीं याद के सहारे वो आज भी बड़ी जिंदा दली से अपनी जिंदगी बीता रहीं हैं।

कुल सात बार फिल्म फेयर का बेस्ट सिंगर का अवार्ड जीतने वालीं आशा भोंसले के दुनियाभर में फैन हैं। साल 2000 में दादा साहेब फाल्के और साल 2008 में पद्म विभूषण मिला। छह दशक फिल्मी सफर में मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, मलयालम, अंग्रेजी और रूसी भाषा में करीब 15 हजार से ज्यादा गाने गाए।

आज 90 वो गायिकी को अल्प विराम देकर अपने रेस्टोरेंट के बिजनेस को आगे बढ़ा रही हैं। दुबई, कुवैत, मैनचेस्टर के अलावा दुनियाभर में उनके दर्जनभर से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं।

संगीत के सुरों से रसोई के स्वाद तक के इस सफर में आशा ताई की नेटवर्थ करीब 80 करोड़ रुपये हैं। वो उसी ऊर्जा के साथ इस काम को न सिर्फ देख रही हैं, बल्कि खुद भी अपने रेस्टोरेंट के किचन में खाना पकाती नजर आती हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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