Singer Mukesh : पल दो पल नहीं, हर पल की आवाज़

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कई बार यूं भी देखा है, ये जो मन की सीमा रेखा है

मन तोड़ने लगता है।

अनजानी प्यास के पीछे, अनजानी आस के पीछे

मन दौड़ने लगता है।।

ये गाना साल 1974 की फिल्म ‘रजनीगंधा’ का है। योगेश ने लिखा है, म्यूजिक सलिल चौधरी का है और जिसने ये गाना गाया उन्हें इस गाने के लिए बेस्ट सिंगर का नेशनल अवार्ड मिला था। ये सिंगर मुंबई तो एक्टर बनने आए थे। लेकिन जल्द ही उन्हें लगा एक सेकेंड क्लास एक्टर होने से बेहतर है, एक फर्स्ट क्लास सिंगर होना। म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद ने उनको केएल सहगल की कॉपी के टैग से बाहर निकाला। उन्हें अपनी आवाज और अपने स्टाइल में गाने का हुनर दिया। फिर वो ऐसे सिंगर बने जो लोगों के दिलों में दर्द भर सकता था। गाने इतने सरल कोई भी गुनगुना ले। आज कहानी हिंदी सिनेमा के दिग्गज सिंगर मुकेश की। जिनकी जिंदगी में ऐसा दौर भी आया जब वो एक-एक पैसे के लिए मोहताज हुए।

दिल्ली के रहने वाले जोरावर चंद माथुर और चंद्रानी माथुर के घर 22 जुलाई साल 1923 को मुकेश चंद्र माथुर का जन्म हुआ। 10 भाई-बहनों में मुकेश सातवें नंबर पर थे।

जोरावर चंद्र माथुर ने अपनी बेटी सुंदर प्यारी के लिए एक म्यूजिक टीचर रखा। बहन म्यूजिक सीखती तो मुकेश भी पास बैठ जाया करते। इस तरह से म्यूजिक का शौक जागा। वक्त गुजरा और बहन सुंदर प्यारी की साल 1937 में शादी हो गई।

शादी वाले दिन बारातियों में अपने दौर के दिग्गज एक्टर मोती लाल के साथ उनके दोस्त प्रोड्यूसर और एक्टर तारा हरीश भी शामिल थे।

मुकेश ने इंटरव्यू में बताया था कि ‘बारातियों के स्वागत के लिए कोई शराब ला रहा है, कोई कबाब ला रहा है। हमने भी कहा कि, हार्मोनियम लगाओ, हम गाना गाएंगे। सहगल साहब का गाना गाया। अगले दिन मोतीलाल और तारा हरीश हमारे घर आ गए। पिताजी से कहा कि आपके बेटे में बहुत टैलेंट है। फिल्मों में काम क्यों नहीं करते? पिताजी जो एक इंजीनियर थे वो चाहते थे कि मैं पढ़ लिखकर क्लर्क बनूं, पर गवइया न बनूं। इसलिए उनको मना कर दिया।’

किताब- सुनहरे स्वर और सुनहरे दिल का मालिक में अमरजीत सिंह कोहली लिखते हैं कि ‘मुकेश मैट्रिक करके दिल्ली में ही सर्वेयर की नौकरी करने लगे। अभी सात-आठ महीने बीते थे। फिर से एक्टर मोतीलाल का तार आ गया। कहा कि मुंबई आ जाओ। इस बार मुकेश के पिता ने कहा कि जब वो लोग इतना कह रहे हैं, तो शायद तुम्हारे अंदर कोई टैलेंट हो। जाओ, अपना मुकद्दर आजमा लो।’

साल 1940 मुकेश मुंबई आ गए। उनकी पर्सनालिटी बिल्कुल हीरो जैसी थी। इसी वजह से साल 1941 की फिल्म ‘निर्दोष’ से बतौर एक्टर और सिंगर बॉलीवुड में डेब्यू किया। लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई। अगले चार सालों में सिर्फ एक-दो फिल्मों में छोटे मोटे रोल किए।एक्टर मोतीलाल ने एक बार फिर साल 1945 की फिल्म ‘पहली नजर’ में गाने का मौका दिया।

‘दिल जलता है तो जलने दे, आंसू न बहा, फरियाद न कर’ गाना तो हिट हुआ पर संघर्ष जारी था।

मुकेश जब 23 साल के हुए तो उन्हें सरला से मोहब्बत हो गई। सरला के पिता खूब पैसे वाले थे। उनके पिता की नजरों में फिल्मों में सिंगिंग इज्जतदार काम नहीं था। वो शादी के खिलाफ थे। बावजूद इसके 22 जुलाई, साल 1946 को मुकेश ने अपने जन्मदिन वाले दिन मंदिर में सरला से शादी कर ली।

1949 की बरसात और साल 1951 की फिल्म आवारा से राज कपूर की आवाज बनने का मौका मिला। इन फिल्मों के गाने सुपरहिट हुए पर उनके घर के आर्थिक हालात नहीं सुधरे।

एक दौर वो आया था जब मुकेश एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो गए।

मुकेश और सरला के पांच बच्चों में से एक सिंगर नितिन मुकेश हैं। वो एक इंटरव्यू में अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि ‘अजीब बात ये है कि ‘आवारा हूं’ और ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे गाने गाकर पिताजी 'द मुकेश' बन गए। फिर भी छह-सात साल संघर्ष किया। एक वक्त था जब वो मेरी और मेरी बहन की स्कूल की फीस नहीं भर सके। तो एक सब्जी वाले से उधार लिया।’

साल 1959 में राज कपूर की अनाड़ी में मुकेश को ‘सब कुछ सीखा हमने’ गाना गाने के लिए फिल्म फेयर का अवार्ड मिला। इसके बाद धीरे-धीरे संघर्ष का दौर भी खत्म होने लगा। 

वो राज कपूर के लिए तो गा ही रहे थे उन्होंने सुनील दत्त, मनोज कुमार, दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ के लिए भी कई सुपरहिट गाने गाए। मुकेश ने अपने दौर के सिंगर्स के मुकाबले बेहद कम करीब 1300 गाने गाए। 

बेस्ट सिंगर का चार बार फिल्म फेयर का अवार्ड जीतने वाले मुकेश फिल्म ‘कभी कभी’ के बाद कॉन्सर्ट के लिए विदेश जाने लगे।

ऐसे ही एक कॉन्सर्ट के लिए साल 1976 में जब वो अमेरिका गए। 27 अगस्त की सुबह पत्नी सरला से बोले - मेरे सीने में दर्द हो रहा है। अस्पताल ले गए, डॉक्टर ने नब्ज थामते ही कह दिया- ही इज नो मोर

पल दो पल का नहीं हर एक पल का ये सिंगर सिर्फ 53 साल की उम्र में दुनिया छोड़ चुका था। 

मुकेश के जाने के बाद भी उनकी कई फिल्में अगले तीन साल तक आती रहीं और लोग उनकी आवाज को पसंद करते रहे। 

आज मुकेश का सौवां बर्थडे है आपको मुकेश का कौन सा गाना पसंद है कमेंट करके बताएं। मुझे तो उनका साल 1971 की फिल्म आनंद का एक गीत बेहद पसंद है। मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने सपने सुरीले सपने।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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