Vijaya Lakshmi Pandit : दुनिया भर से जीतीं, भतीजी से हारीं

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विजय लक्ष्मी पंडित पहली महिला थीं जो कैबिनेट मंत्री बनीं। दुनिया की पहली महिला थीं जो UN की प्रेसिंडेड बनीं। तीन देशों की हाई कश्मिनर रहीं। मोहब्बत की, तो मजहब आड़े आ गया। भाई के निधन से जीवन अकेला हो गया। जो दुनिया भर से जीतीं पर अपनी भतीजी से हार गईं।

 

साल 1937 तब भारत में पहली बार एक महिला को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। बाद में ये दुनिया की पहली महिला थीं जो UN की प्रेसिंडेड बनीं। तीन-तीन देशों की हाई कश्मिनर रहीं। ये वो महिला थीजिन्हें अपने भाई जवाहर लाल नेहरू का साथ मिला तो अपने नाम की तरह ही हर मोर्चे में विजेता बनीं। देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन जीवन के कुछ पन्ने गहरे रंग के भी रहे। मोहब्बत कीतो मजहब आड़े आ गया। शादी कीतो पति की जेल में मौत हो गई। भाई के निधन से जीवन अकेलापन से भर गया।

आज कहानी विजयलक्ष्मी पंडित कीजो दुनिया भर से जीतीं पर अपनी भतीजी इंदिरा गांधी से हार गईं। वजह थी, मुंह से बोले गए ताने  

इलाहाबाद में जाने-माने वकील पंडित मोतीलाल नेहरू अपनी पत्नी स्वरूप रानी के साथ रहते। इन्हीं घर 18 अगस्तसाल 1900 को एक बेटी का जन्म हुआ। नाम रखा विजयलक्ष्मी। विजयलक्ष्मी की सात साल छोटी बहन थीं कृष्णा नेहरू और 11 साल बड़े भाई थे जवाहरलाल नेहरू।

ये वो दौर था जब ज्यादातर अमीर और पढ़े लिखे घरों की महिलाएं ही पॉलिटिक्स में हिस्सा लेतीं। विजयलक्ष्मी भी पढ़ाई के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने लगीं। वक्त गुजरा और वो The Independent अखबार से जुड़ीं। दरअसल ये अखबार मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद से चलाते। साल 1919 में अखबार के एडिटर सैय्यद हुसैन बनाए गए। उस दौर में सैय्यद हुसैन अक्सर बेबाक बोल के लिए चर्चित रहते। उन्होंने तब अमेरिका में गांधीजी पर लिखा था और उन पर लेक्चर दिया था।

31 साल के सैय्यद हुसैन का व्यक्तित्व शानदार था। ये देखकर 19 साल की विजय लक्ष्मी उनके आकर्षण में बंध गईं। दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे। लेकिन मजहब की दीवार आड़े आ गईं। 

पत्रकार और लेखक सईद नकवी की किताब 'बीइंग द अदर्सके मुताबिक उस वक्त नेहरू परिवार तो इस रिश्ते के खिलाफ था ही। महात्मा गांधी भी मानते थे कि, इससे स्वतंत्रता आंदोलन पर असर पड़ेगा।

सैय्यद हुसैन गांधीजी को बहुत मानते। बात बिगड़ती इससे पहले सैय्यद ने इलाहाबाद छोड़ दिया। गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन का प्रवक्ता बनाकर हुसैन को इंग्लैंड भेज दिया।

अफवाह उड़ी की विजयलक्ष्मी और हुसैन ने शादी कर ली। इस बात विराम तब लगा जब विजयलक्ष्मी की शादी महाराष्ट्र के काठियावाड़ के बड़े वकील रणजीत सीताराम पंडित से। दोनों के तीन बेटियां हुईं। चंद्रलेखानयनतारा और रीता।

अक्सर आपने एक तस्वीर देखी होगीजिसमें एक लड़की नेहरू को किस करती हुईं नजर आती हैंवो कोई और नहीं नेहरू की भांजी और विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी नयनतारा सहगल ही हैं।

विजयलक्ष्मी और सीताराम का साथ लगभग 23 साल का रहा। सीताराम को स्वतंत्रता आंदोलन के चलते गिरफ्तार कर लिया गया। जहां जेल में ही साल 1944 में उनका निधन हो गया। अब विजय लक्ष्मी पंडित का सहारा उनके भाई जवाहर लाल नेहरू ही थे। ये वो दौर था जब विजयलक्ष्मी पंडित का खूब रौब था।

देश जब गुलाम था तब विजयलक्ष्मी पंडित साल 1937 में ब्रिटिश इंडिया के यूनाइटेड प्रोविन्सेस में कैबिनेट मंत्री बनीं।

1937 से 1939 तक यूनाइटेड प्रोविन्सेस में 'लोकल सेल्फ-गवर्नमेंटऔर 'पब्लिक हेल्थका डिपार्टमेंट संभाला।

1946 में संविधान सभा में चुनी गईं। औरतों की बराबरी से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से राय रखी।

1947 से 1949 तक रूस में राजदूत रहीं। उस दौर में ये अफवाह थी कि सुभाषचंद्र बोस रूस में हैं और विजयलक्ष्मी पंडित ने उनको देखा है।

1949 से 1951 तक अमेरिका की राजदूत रहीं।

1953 में तो भारत का सिक्का पूरी दुनिया में जमा दिया। वो यूएन जनरल असेंबली की प्रेसिडेंट रहीं। ये पूरे विश्व में पहली बार था जब ये पद कोई महिला संभाल रही थीं।

1955 से 1961 तक इंग्लैंडआयरलैंड और स्पेन में हाई कमिश्नर रहीं।

1962 से 1964 तक महाराष्ट्र की गवर्नर रहीं।

1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद विजय लक्ष्मी पंडित फूलपुर से सांसद चुनीं गईं।

जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद विजयलक्ष्मी राजनीति से साइड लाइन कर दी गईं। वजह थी कांग्रेस में इंदिरा गांधी का वर्चस्व बढ़ रहा था। इंदिरा गांधी नहीं चाहतीं थी कि बुआ विजयलक्ष्मी का कोई दखल हो। वजह थी कि इंदिरा गांधी खुद का और अपनी मां कमला नेहरू के अपमान का बदला ले रही थीं।

दरअसल, इंदिरा गांधी की मां और जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू एक साधारण परिवार से थीं। नेहरू परिवार बहुत हाई-फाई था। इस बात से  कमला नेहरू का हमेशा मजाक बनता।

इंदिरा गांधी की करीबी दोस्त पुपुल जयकर ने इंदिरा गांधी की बायोग्राफी लिखी है

पुपुल लिखती हैं, 'छह साल की उम्र में ही इंदिरा ने मां की हताशा को महसूस किया। मां के बारे में बुआ विजयलक्ष्मी के 'घटिया तानेको वो सुनतीं तो मां के पक्ष में बोल पड़ती।'

पुपुल आगे लिखती हैं, 'इंदिरा गांधी के लिए ये दिन कष्टप्रद थे। विजयलक्ष्मी अक्सर इंदिरा को 'मूर्ख और बदसूरतकहतीं। इंदिरा ने इन जहरीले शब्दों के लिए बुआ को कभी माफ नहीं किया।'

भाई जवाहर लाल नेहरू के सामने ताकतवर रहने वाली विजयलक्ष्मी भजीती इंदिरा गांधी के आगे लाचार हो गईं।

इस बात का बदला विजयलक्ष्मी पंडित ने तब लिया जब इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लगाया। विजयलक्ष्मी पंडित ने अपनी बेटी नयनतारा सहगल के साथ मिलकर इंदिरा गांधी का खुलकर विरोध किया।

विजयलक्ष्मी पंडित जिंदगी के आखिरी वक्त देश-विदेश के महिला संगठनों से जुड़ीं। वो अक्सर कांग्रेस सरकार की नीतियों की आलोचना भी करतीं। 

01 दिसंबरसाल 1990, 90 साल की उम्र में विजयलक्ष्मी पंडित का निधन हो गया।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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