यशस्वी जायसवाल की तूफानी बल्लेबाजी का श्रेय मांगने लगे बेन डकेट

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‘बैजबॉल गेम’ का मतलब ही होता है कि बगैर विकेट की चिंता किए बल्लेबाज तूफानी अंदाज में रन बनाए.

इंड़िया-इंग्लैड़ के बीच तीसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम को रनों के हिसाब से टेस्ट की सबसे बड़ी जीत मिली. मैच में न सिर्फ भारतीय टीम की गेंदबाजी ऑन-प्वाइंट थी, बल्कि बल्लेबाजी धमाकेदार थी. इंग्लैंड टीम के भारत दौरे पर आने से पहले उनकी बैजबॉल का खूब हल्ला था, लेकिन राजकोट के मैदान पर टीम इंड़िया ने उन्हें असल खेल दिखाया. टीम इंग्लिश टीम बीते 20 महीने से बैजबॉल की दम दिखा रही है. दरअसल, पिछले साल जब एशेज सीरीज में इंग्लैंड को शर्मनाक हार मिली थी, तो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने जो रूट को हटाकर बेन स्टोक्स को कप्तान और न्यूजीलैंड के पूर्व तूफानी बल्लेबाज ब्रैंडन मैक्कुलम को हेड कोच बना दिया था. जिसके बाद इंग्लिश टीम की प्लेइंग स्ट्रैटिजी आक्रामक नजर आई.

‘बैजबॉल’ रणनीति का इंग्लैंड को फायदा भी हुआ. बेन स्टोक्स के कप्तान बनने और ब्रैंडन मैकुलम के हेड कोच बनने के बाद इंग्लैंड ने 13 टेस्ट मैचों में से 11 में जीत दर्ज की है. इसलिए बैजबॉल की क्रेडिट इंग्लिश टीम को जाता है. वैसे, ‘बैजबॉल गेम’ का मतलब ही होता है कि बगैर विकेट की चिंता किए बल्लेबाज तूफानी अंदाज में रन बनाए. क्रिकेट बुक में इसकी कोई ऑफिशियल बैजबॉल थ्योरी नहीं है, लेकिन इसे इंग्लैंड की टेस्ट टीम के नए अटैकिंग अप्रोच को दिखाने के लिए नाम दे दिया गया. 

जैसा कि नाम से ही साफ है, बैजबॉल 2 शब्द, बैड और बॉल से मिलकर बना है, 'बैज' हेड कोच ब्रेंडन मैक्कुलम का निकनेम है और 'बॉल' क्रिकेट का एक एलिमेंट, जिसके बिना खेल पॉसिबल ही नहीं है। इन दोनों शब्दों को मिलाकर बनाया गया 'बैजबॉल'. अब जब टीम इंड़िया ने इंग्लैड को 434 रनों से हराया है, जिसमें पहली पारी में रोहित शर्मा ने 131 रन, रवींद्र जडेजा ने 112 रन की पारी खेली. दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल ने नाबाद 214 रन बनाए। शुभमन गिल ने 91 रन की पारी खेली और सरफराज खान ने दोनों इंनिंग मे हॉफ सेंचुरी लगाई, तो इसका क्रेडिट में भी इंग्लिश टीम खुद को देना चाह रही.

इस मैच में टीम इंडिया ने टोटल 81 चौके और 28 छक्के लगाए हैं और इंग्लैड टीम ने 59 चौके और 5 छक्के लगाए हैं. दरअसल, राजकोट टेस्ट में इंग्लिश टीम के इकलौते कारगर साबित हुए इकलौते बल्लेबाज बेन डकेट ने कहा कि जब आप विपक्षी प्लेयर्स को इस तरह खेलते देखते हैं, ऐसा लगता है कि हमें इस बात का क्रेडिट लेना चाहिए कि ये लोग बाक़ी लोगों से अलग तरीके से टेस्ट क्रिकेट खेल रहे हैं. बाक़ी प्लेयर्स, टीम्स को ऐसे अटैकिंग क्रिकेट खेलते देखना उत्साह बढ़ाने वाला है. हालांकि यहां पर ये कहना जरुरी है कि शायद बेन डकेट शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, सरफराज, टीम इंड़िया की यंग बिग्रेड की बैटिंग हिस्ट्री नहीं देखी, ये खिलाड़ी अग्रेसिव क्रिकेट की ही अप्रोच रखते हैं.

खैर, इंग्लिश टीम के पूर्व खिलाड़ी माइकल वॉन ने खराब प्रदर्शन के बाद बैजबॉल रणनीति की आलोचना की है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, 'मुझे डर है कि इस सप्ताह बैजबॉल का पर्दाफाश हो गया है. पहला टेस्ट एक ऐसी पिच थी, जहां गेंद ने हर तरह की हरकत की. इसलिए हमें उस पिच पर बैजबॉल मिला, लेकिन आखिरी दो टेस्ट जहां पिचें सकारात्मक इरादे से खेलने के लिए बिल्कुल सटीक थीं, वहां हमारी बल्लेबाजी ढह गई. यहां कॉमन सेंस के साथ खेलने की जरूरत थी. बैजबॉल ईजाद करने वाले इंग्लिश टीम के हेड कोच मैक्कुलम अपने करियर के दौरान बहुत अटैकिंग बैटिंग करते थे. ओपनिंग करते हुए वे पहली से आखिरी बॉल तक बड़े शॉट्स लगाने पर ही फोकस करते थे. हालांकि, टीम इंड़िया के पूर्व बल्लेबाज और ब्रैंडन मैक्कुलम से पहले क्रिकेट में कदम रखने वाले वीरेंद्र सहवाग भी अग्रेसिव बैटिंग स्टाइल के लिए जाने जाते रहे हैं. 

 

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