Sarfaraz Khan और Dhruv Jurel के Struggle की Story आपका दिल जीत लेगी

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रात को वक्त चाहिए गुजरने के लिए

लेकिन सूरज मेरी मर्ज़ी से नहीं निकलने वाला

ये बात क्रिकेट मैदान में कमेंट्री करते हुए टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज सरफराज खान के पिता नौशाद खान ने कही, जो खूब चर्चा में बनी हुई है. दरअसल राजकोट में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया की ओर से दो खिलाड़ियों ने डेब्यू किया एक सरफराज खान तो दूसरे ध्रुव जरेल ने, इन दोनों ही खिलाड़ियों की चर्चे क्रिकेट जगत में छाए हुए है. यहां तक की सोशल मीडिया पर तो दोनों की कहानियों के किस्से भी खूब सुनाई दे रहे है. एक ओर जहां सरफराज खान के पिता ने अपने बेटे को टीम इंडिया तक पहुंचाने के लिए जी तोड़़ मेहनत की तो वहीं दूसरी ओर ध्रुव जरेल भी एक ऐसे खिलाड़ी है जिनकी मां ने गहने गिरवी रखकर बेटे को मैदान में खेलने के लिए भेजा था. सबसे पहले बात करते है सरफराज खान की. जो 15 सालों से टीम इंडिया में सेलेक्ट होने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे थे. जिनका इनाम उन्हें मिला तो पिता की आंखों में भी आंसू छलक उठे, दरअसल तीसरे टेस्ट मैच की शुरुआत में वो हुआ जिसका हर कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा था. टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज अनिल कुंबले ने सरफराज को टेस्ट कैप नंबर 311 थमाते हुए कहा सरफू मुझे गर्व है तुम्हारे ऊपर और जिस तरह से तुम यहां तक पहुंचे हो, मुझे भरोसा है कि तुम्हारे पिता और परिवार को तुम्हारी कामयाबी पर बेहद फख्र होगा. ये कैप आपके लिए है, ऑल द बेस्ट.

अनिल कुंबले जब ये सब कह रहे थे, तब बाउंड्री के पार मौजूद सरफराज खान के पिता अब्बू नौशाद खान इमोशनल हो गए, उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन ये खुशी के थे. इसी दिन का ख्वाब उन्होंने अपने बेटे के लिए देखा था जो आज सच हुआ, लेकिन उन्हें पता है कि ये महज शुरुआत है, वो अपने बेटे को एक कामयाब इंटरनेशनल क्रिकेटर के तौर पर देखना चाहते हैं. सरफराज को पहले तो उनके टीम मेंबर्स ने गले लगाकर मुबारकबाद दी, फिर तो तुरंत मैदान के छोर पर चले गए जहां उनके पिता और वाइफ मौजूद थे. सरफू ने दौड़कर अपने अब्बू को गले लगाया, वो जानते थे कि ये कामयाबी उनके अकेले की नहीं है. इस दिन को देखने के लिए पापा ने कितनी कुर्बानियां दी हैं.

हालांकि नौशाद खान ने पुराने गम को भुलाते हुए शानदार बात कही, "पहले मैं जब मैं बहुत मेहनत करता था तो ये सोचता था, जो मेरा ख्वाब है आंखों का हिस्सा क्यों नहीं होता? दिये हम भी जलाते हैं उजाला क्यों नहीं होता?, ये सोच थी पहले, लेकिन आज कैप मिलने के बाद मेरी सोच बदल गई, और तमाम बच्चों के लिए जो मेहनत करते हैं. उन्होंने आगे कहा रात को वक्त दो गुजरने के लिए, सूरज अपने ही समय पर निकलेगा, जब उसका टाइम आएगा, जो समय आएगा, तभी वो काम होगा, अपना काम है मेहनत करना, सब्र करना, और हिम्मत नहीं छोड़ना बस. नौशाद खान सिर्फ सरफराज के पिता ही नहीं उनके क्रिकेट कोच भी हैं, वो समझते हैं कि ये कामयाबी रातोंरात नहीं मिली है, इसके लिए उन्होंने अपने बेटे पर काफी मेहनत की है, मुंबई रणजी टीम में लगातार खेलना आसान नहीं होता, यहां आपको टीम में बने रहने के लिए लागातार परफॉर्मेंस देनी होती है. इस दौरान उनकी पत्नी रोमाना भी मौजूद थी. जिनकी आंखों में आंसू गए थे. सरफू उसे पोंछते हुए भी नजर आएं. बता दें सरफराज खान ने टीम इंडिया में डेब्यू करते हुए शानदार पारी खेली और आते ही चौके छक्के की बारिश करते हुए पचासा ठोक दिया, जिसके बाद पिता ने भी ताली बजाते हुए अभिवादन किया तो पत्नी रोमाना ने फ्लाइंग किस दी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसका यकीन किसी को नहीं हुआ. दरअसल शतक की ओर तेजी से सरफराज खान बढ़ रहे थे लेकिन जडेजा की रन को लेकर एक रॉन्ग कॉल ने उन्हें रन आउट करा दिया जिसके बाद रोहित का भी गुस्सा फूटा, और उन्होंने ड्रेसिंग रुम में अपनी कैप को जमीन पर फेंक दिया. इतना ही नहीं फैन्स ने भी रन आउट को लेकर जडेजा को काफी कोसा. जडेजा ने माफी भी मांगी. बता दें  सरफराज खान ने डेब्यू मैच में 66 गेंद पर 62 रन बनाए है, भले ही रोहित और जडेजा ने शतकीय पारी खेली हो लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस बीच सरफराज खान की हो रही है.

बता दें सरफराज खान के साथ-साथ ध्रुव जुरेल के संघर्ष की कहानी भी लोगों के दिलों को छू रही है. एक ऐसा लड़का जिसके पिता ने पाकिस्तानियों के कारगिल युद्ध में छक्के छुड़ाए थे अब वही खिलाडी फिरंगियों के छक्के छुड़ाने को तैयार है. दरअसल सरफराज के साथ ध्रुव जुरेल का भी डेब्यू हुआ है. वो भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाला 312वें खिलाड़ी है. उनके पिता ने पूरी जिंदगी कंधे पर बंदूक टांगकर भारत की रक्षा करने में गुजारी तो करगिल वॉर में पाकिस्तान से लोहा भी लिया. यही नहीं, जुरेल को क्रिकेट किट दिलाने के लिए पैसे नहीं थे तो मां ने अपने गहने बेचे. तब जाकर आज ये बेट भारत के लिए डेब्यू कर सका है. दिनेश कार्तिक ने उन्हें डेब्यू कैप पहनाई.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ध्रुव जुरेल के पिता चाहते थे कि बेटा एनडीए का एग्जाम दे और बड़ा ऑफिसर बनकर उनकी ही तरह इंडियन आर्मी में देश की सेवा करे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. टीम मैनेजमेंट ने केएस भरत की जगह उन्हें मौका देने का फैसला किया, जिन्होंने पिछले कुछ मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. बता दें 23 साल के ध्रुव जुरेल आगरा के रहने वाले है. इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो वो अपने बेटे की सफलता से रोमांचित हैं. नेम सिंह चाहते थे कि ध्रुव NDA में शामिल हों और देश की सेवा करें, लेकिन क्रिकेट के प्रति ध्रुव का जुनून उन्हें एक अलग दिशा में ले गई. हालांकि, उनके परिवार में पहले कोई भी क्रिकेट नहीं खेलता था, लेकिन ध्रुव की प्रतिभा को जल्दी ही पहचान लिया गया और उनके पिता ने उनके कौशल को विकसित करने के लिए कोच परवेंद्र यादव की मदद मांगी. पिता का आज भी याद है कैसे मां ने गिरवी रख दिया था गहना उनके पिता उन बलिदानों को याद करते हैं जो उन्होंने अपने क्रिकेट सपनों का समर्थन करने के लिए दिए थे. ध्रुव के लिए पहला क्रिकेट किट खरीदने के लिए उनकी मां ने अपनी एकमात्र सोने की चेन भी गिरवी रख दी थी. आर्थिक परिस्थिति गवाही नहीं दे रही थी, लेकिन ध्रुव दृढ़ निश्चयी रहे और कड़ी मेहनत करते रहे. आज उसी मेहनत का रिजल्ट सामने है. इन दोनों खिलाड़ियों के लिए आपकी क्या राय है कमेंट्स करके जरूर बताएं और वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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