क्या होती हैं हाइब्रिड कार, इन्हें खरीदना कितना फायदे का सौदा ?

Home   >   Techमंच   >   क्या होती हैं हाइब्रिड कार, इन्हें खरीदना कितना फायदे का सौदा ?

17
views

देश से लेकर विदेश में बढ़िया माइलेज और फीचर्स वाली हाइब्रिड कारें ग्राहकों को खूब लुभा रही हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इस कार में पेट्रोल की बचत होना और एनवायरनमेंट को कम नुकसान होना जैसे फीचर्स हैं।

आज का हाईटेक जमाना इलेक्ट्रिक कारों का माना जा रहा है। पेट्रोल की बचत और पर्यावरण की बचत के लिए ये गाड़ियां स्टेटस सिंबल बनती जा रही हैं। लेकिन इसी बीच लोगों में तेजी से क्रेज बना रही है हाइब्रिड कार। वो कार जो आपको पेट्रोल (Petrol) और बैटरी दोनों का ऑप्शन देती है। हाल ही में आई कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि बढ़िया माइलेज और फीचर्स वाली हाइब्रिड कारें (Hybrid Car) देश से लेकर विदेश में ग्राहकों को खूब लुभा रही हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इस कार में पेट्रोल की बचत होना और एनवायरनमेंट को कम नुकसान होना जैसे फीचर्स हैं और इसमें चार्जिंग का झंझट भी नहीं है। तो चलिए आपको बताते हैं कि हाइब्रिड कार और इसकी खूबियां और इस बजट के बाद इन्हें खरीदना कितना आसान हो जाएगा...

भारत दुनिया के सबसे बड़े कार मार्केट में से एक है, देश में बिकने वाली हर पांचवीं कार अब सीएनजी, इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड है। दो साल में इन कारों की हिस्सेदारी 9.29 प्रतिशत से दोगुना बढ़कर 19.23 प्रतिशत पहुंच गई। ऑटोमोटिव बिजनेस इंटेलिजेंस फर्म जैटो डायनेमिक्स के मुताबिक, इस दौरान पेट्रोल मॉडलों की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत घटी है। भारत में टोयटा और मारुति की हाइब्रिड गाड़ियों की सबसे ज़्यादा डिमांड है। आंकड़ों की मानें तो साल 2023 के अप्रैल से लेकर जून तक सबसे ज़्यादा करीब सात हज़ार लोगों ने टोयटा इनोवा हाइक्रॉस कार खरीदी। इसके बाद दूसरे नंबर पर मारुति सुजुकी की ग्रैंड विटारा रही जिसके करीब साढ़े तीन हज़ार कस्टमर थे। जबकि तीसरे पर टोयटा की ही अर्बन क्रूजर थी, जिसे करीब 2200 लोगों ने खरीदा और चौथे पर होंडा सिटी ईएचईवी रही, जिसे करीब 550 लोगों ने खरीदा। देश में ईवी के मुकाबले, हाइब्रिड कारों की बिक्री ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (एचईवी) की बिक्री में 38 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इन कारों का मार्केट शेयर 2.1 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं ईवी की बिक्री में 0.2 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियां लोकप्रिय मॉडलों के सीएनजी वैरिएंट भी लॉन्च कर रही हैं। टाटा नेक्सन और किआ सोनेट के सीएनजी मॉडल आने की तैयारी में हैं। इस ट्रेंड में तेजी आने की उम्मीद है।  मारुति सुजुकी के मुताबिक, साल 2030 में कंपनी की ओर से बेची जाने वाली कुल कारों में 15-20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक और करीब 25 प्रतिशत हाइब्रिड वैरिएंट होंगी। ईवी मार्केट में 73 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली टाटा के मुताबिक, देश में ईवी की हिस्सेदारी साल 2030 तक 20 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जो फिलहाल 2 प्रतिशत है। 

टेक्नोलॉजी पर रिसर्च 

देश की ऑटो कंपनियां इक्रो फ्रेंडली टेक्नोलॉजी और नए प्रोडक्ट तैयार करने के लिए साल 2030 तक 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगी। देश की कार निर्माता कंपनियों ने अगले कुछ सालों में टेक्नोलॉजी पर रिसर्च के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश करने की योजना बनाई है। इन कंपनियों ने देश में प्रोडक्ट डेवलपमेंट, कैपिसिटी बिल्डिंग और पर्यावरण हितैषी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ये निवेश करने की बात कही है। मारुति सुजुकी ने साल 2030 तक नई टेक्नोलॉजी पर 1.25 लाख करोड़ खर्च करने का टारगेट रखा है। टाटा मोटर्स के मुताबिक, वो वित्त वर्ष 2030 तक अपनी ईवी शाखा में 16 से 18 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। हुंडई मोटर इंडिया ने अगले 10 सालों में 32 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा 3 सालों में 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी। आने वाले बजट में उम्मीद की जा रही है कि देश में हाइब्रिड कारों पर लगने वाले टैक्स में कटौती हो सकती है। इससे इनकी कीमतें तो घटेंगी ही। हाइब्रिड कारों पर मौजूदा 28 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 12 प्रतिशत करने की अपील की गई है।

क्या है हाइब्रिड कार ?

हाइब्रिड कार यानी वो गाड़ी जिसमें इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों मौजूद हों। यानी ये वो गाड़ियां हैं जो एक से ज़्यादा फ्यूल ऑप्शन के साथ चलती हैं। इनमें पेट्रोल इंजन के साथ मौजूद इलेक्ट्रिक बैटरी ऑटोमेटिक चार्ज होती है। जब गाड़ी स्लो स्पीड पर होती है तो बैटरी से चलती है और जैसे ही स्पीड पकड़ती है, ऑटोमेटिक पेट्रोल पर शिफ्ट हो जाती है। इलेक्ट्रिक कारों को लेकर लोगों के मन में एक सबसे बड़ी दुविधा होती है चार्जिंग की, तो आपको बता दें कि हाइब्रिड कारों में आपको इस परेशानी से छुटकारा मिल जाता है। इसमें आपको बैटरी चार्ज करने के लिए किसी इलेक्ट्रिक चार्जर में नहीं लगाना पड़ता है बल्कि पेट्रोल इंजन पर चलते वक्त बैटरी ऑटोमेटिकली चार्ज हो जाती है।  

खर्च कितना होता है ?

वैसे तो हाइब्रिड कार खरीदते वक्त ये थोड़ी महंगी लग सकती है, लेकिन बाद में ये कार आपको माइलेज में इतना फायदा देगी कि आपको गाड़ी पैसा वसूल लगने लगेगी। मान लीजिए कि दिल्ली से गुरुग्राम जाते वक्त पेट्रोल कार 15 का माइलेज दे रही है, तो हाइब्रिड कार उतनी ही दूरी के लिए करीब 24 या 25 का माइलेज देगी। अगर आप ट्रैफिक में फंसे हैं, तो आपको हाइब्रिड कार में पेट्रोल खत्म होने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि उस वक्त कार बैटरी का इस्तेमाल करती है और पेट्रोल की बड़ी बचत हो जाती है यानी इस कार के साथ पेट्रोल का खर्च आपकी जेब को ज्यादा खाली नहीं करेगा।

हाइब्रिड कारें कितनी तरह की होती हैं ?

मार्केट में हाइब्रिड व्हीकल तीन तरह की होती हैं। एक माइल्ड हाइब्रिड, दूसरी स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और तीसरी प्लग-इन हाइब्रिड। माइल्ड हाइब्रिड कार में सिर्फ एक मोटर और बैटरी का इस्तेमाल होता है। इसकी पावर भी दूसरों की तुलना में बहुत हल्की है। इस इंजन को चलाने के लिए इलेक्ट्रिक मोटर का सहारा लेना पड़ता है। इससे गाड़ी का माइलेज थोड़ा बढ़ जाता है। वहीं स्ट्रांग हाइब्रिड एक पावरफुल बैटरी पैक के साथ एक पावरफुल इंजन का इस्तेमाल करता है। दमदार हाइब्रिड कार का माइलेज बढ़ाने के लिए दमदार बैटरी और मोटर दोनों की जरूरत होती है। इसे 30 से 40 की स्पीड तक बैटरी से चलाया जा सकता है। इसके बाद तय स्पीड पर आने के बाद ये फ्यूल से चलने लगती है। माइल्ड हाइब्रिड कार की तुलना में पिकअप और टॉप स्पीड बहुत ज्यादा है। अगर बात प्लग इन हाइब्रिड की करें तो ये कार प्लग इन करके चार्ज होती है। इसमें पेट्रोल का ऑप्शन तो होता ही है लेकिन इसकी बैटरी बड़ी होती है और ये ऑटोमैटिक चार्ज होने के बजाय इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरह चार्ज होती है। फिलहाल भारत में प्लग इन हाइब्रिड कार उपलब्ध नहीं हैं।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!