ठगी का नया तरीका डिजिटल अरेस्ट क्या है, कैसे बचा जा सकता है?

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साइबर जालसाजों ने पार्सल में ड्रग्स होने का डर दिखाकर नोएडा की एक महिला को पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट (Digital House Arrest) कर 1 करोड़ 30 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस दौरान ठगों ने महिला को स्काइप कॉल पर 5 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और दस खातों में रकम ट्रांसफर करा ली। पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का शिकार हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये डिजिटल अरेस्ट क्या है और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धोखाधड़ी से कैसे बचा जा सकता है। तो आइए सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर डिजिटल अरेस्ट है क्या ?

दरअसल, डिजिटल अरेस्ट...साइबर क्राइम (Cyber Crime) का नयाब तरीका है। सबसे पहले साइबर क्रिमिनल्स पुलिस का अधिकारी बनकर आपके फोन पर कॉल करता है। फिर बताया जाता है कि आपका आधार कार्ड, सिम कार्ड या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी काम के लिए हुआ है। यहां से आपको डराने-धमकाने का खेल शुरु होता है। यही नहीं, अधिकारी बने ये स्कैमर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर घर में कैद कर लेते हैं। इसके बाद आपको स्काइप या दूसरे वीडियो कॉल ऐप के जरिए वीडियो कॉल से जोड़ा जाता है। ठग वीडियो कॉल में अपने बैकग्राउंड को किसी पुलिस स्टेशन की तरह बना लेते हैं, जिसे देखकर पीड़ित डर जाता है और वो उनकी बातों में आ जाता है। अपराधी आपको वीडियो कॉल से ना हटने देता है ना ही किसी को कॉल करने देते हैं। आपके लैपटॉप की स्क्रीन को अपने कंट्रोल में लेने के बाद तमाम चीजें खंगाली जाती है। इसके बाद आपको अरेस्ट करने की धमकी देकर डराया जाता है और आखिर में गिरफ्तारी और बदनामी के डर से लोग आसानी से अधिकारी बने स्कैमर के जाल में फंस जाते हैं और आपसे लाखों रुपये ठग लिए जाते हैं।

डिजिटल हाउस अरेस्ट से कैसे बचें ?

तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जैसे कि किसी के साथ अपनी निजी जानकारियां जैसे कि आधार कार्ड, पैन कार्ड या फिर बैंकिंग डिटेल्स शेयर न करें। कोई भी बैंक या फिर सरकारी-गैरसरकारी संस्थान आपसे पिन, OTP जैसी जानकारी नहीं पूछता है। साथ ही, अपने सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट के पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए, ताकि आप ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकें। 

कैसे दर्ज कराएं शिकायत... 

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कॉल आने पर तुरंत पुलिस में शिकायत करें। यदि कोई मैसेज या ई-मेल आता है तो उसे सबूत के तौर पर पुलिस को दें। यदि वीडियो कॉल पर कोई धमकी दे तो स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए वीडियो कॉल को रिकॉर्ड करें और शिकायत करें। सरकार ने हाल ही में इस तरह के साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए संचार साथी वेबसाइट में चक्षु पोर्टल लॉन्च किया है। इसके अलावा ठगी होने पर साइबर थाने या 1930 पर शिकायत करें साथ ही www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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