डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून से आपको कैसे होगा फायदा, जानिए कब तक होगा लागू ?

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बीजेपी के नेतृत्व में NDA की नई सरकार का गठन होने के बाद केंद्र सरकार अब अपने पिछले कार्यकाल में चुनाव से पहले रुके कामों को तेजी से आगे बढ़ाने के मूड में है। संसद में पारित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून (Digital Personal Data Protection Bill) को लागू करने की प्रक्रिया इसी कड़ी का हिस्सा है। जब से ये बिल चर्चा में आया है तभी से लोगों के बीच कई तरह के कंफ्यूजन है कि आखिर डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल है क्या और इससे क्या-क्या बदल जाएगा? तो आज ये ही जान लेते हैं इस वीडियो में...

डिजिटल पर्सनल डेटा क्या है ? 

सबसे पहले जानते हैं कि डिजिटल पर्सनल डेटा होता क्या है। जब भी आप अपने मोबाइल पर कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं तो आपसे कई तरह की परमिशन मांगी जाती हैं। जैसे गैलरी, कॉन्टैक्ट, कैमरा, लोकेशन जैसी चीजों का एक्सेस देना होता है। इसके अलावा आप सोशल मीडिया पर क्या शेयर करते हैं, किससे बात करते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग क्या की, किसको कितने रुपये ट्रांसफर किए जैसी जानकारियां भी इसके अंतर्गत आती हैं। एक लाइन में कहें तो जब आप मोबाइल या किसी गैजेट पर इंटरनेट यूज करते हुए कोई इंफॉर्मेशन शेयर करते हैं तो वो इंफॉर्मेशन उन कंपनियों के लिए डेटा होती है जिनका ऐप या सर्विस आप इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में ऐप या कंपनियां आपके डेटा को एक्सेस कर सकती हैं और ऐप बनाने वाली कंपनी अपने हिसाब से उसका इस्तेमाल करती है। साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा में आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, बायोमेट्रिक से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। कई बार देखा गया है कि कुछ ऐप लोगों के पर्सनल डेटा को अपने सर्वर पर अपलोड कर लेते हैं और फिर उसे दूसरी कंपनियों को बेच देते हैं। हमें ये जानकारी ही नहीं होती कि हमारा डेटा कहां-कहां इस्तेमाल हो रहा है। इस बिल के जरिए इसी तरह के पर्सनल डेटा को प्रोटेक्शन मिलेगा। 

मौजूदा वक्त में क्या है कानून ? 

आपको बता दें अभी तक देश में ऐसा कोई भी कानून नहीं है जो लोगों के पर्सनल डेटा को सुरक्षित रख सके। वहीं पिछले कुछ सालों से डेटा चोरी होने के कुछ घटनाएं सामने आईं हैं। कई देशों में डेटा प्रोटेक्शन को लेकर काफी सख्त कानून भी हैं और अब तो इंडिया में साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और अब जो बिल पास हुआ है वो कंपनियों की जवाबदेही तय करेगा। जिसके बाद वो कहीं भी ग्राहकों को डेटा का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इस बिल के जरिए इसी तरह के डेटा को प्रोटेक्ट किया जा सकेगा। बिल में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह का डेटा शामिल होता है जिसे बाद में डिजिटाइज किया गया हो। इस बिल को लाने का उद्देश्य यूजर्स के डेटा कलेक्शन, स्टोरेज और उसके इस्तेमाल के लिए कंपनियों को जवाबदेह बनाना है। 

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन लॉ कब तक लागू होगा ?

तो केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है इस नियम की ड्राफ्टिंग काफी आगे बढ़ चुकी है। अब सरकार इसे इंडस्ट्री के परामर्श के लिए जल्द सामने लेकर आएगी। इस कानून के तहत लोगों के पर्सनल डेटा की सुरक्षा को सुरक्षित रखा गया है। अगर सोशल साइट्स, वेबसाइट या ऐप आपके डेटा का गलत इस्तेमाल करते हैं तो भारी जुर्माने का प्रावधान भी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिसंबर से शुरू हुए रूल्स ड्राफ्टिंग के काम में काफी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सरकार डिजिटल बाई डिजाइन प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, दरअसल, डिजिटल बाई डिजाइन डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल का ही एक हिस्सा है। इस पर भी तेजी से काम हो रहा है। रूल्स के ड्राफ्ट को लेकर मंत्री ने कहा कि इसमें अभी कोई टाइमलाइन तय नहीं की गई है। हालांकि ड्राफ्ट की समीक्षा करने के बाद उन्होंने इसे काफी संतोषजनक पाया, लेकिन इसमें बदलाव होंगे क्योंकि सभी से सलाह ली जाएगी।

बिल में जुर्माने का प्रावधान शामिल

दरअसल, पिछले साल अगस्त में बिल पारित होने के बाद वैष्णव ने कहा था कि सरकार इसे आने वाले 10 महीने में लागू कर देगी। साथ ही इसके वर्किंग मैकेनिज्म के तहत एक स्वतंत्र डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड बनाने की बात भी कही गई है, जो डिजिटल बाई डिजाइन है। बिल में अलग-अलग अपराधों के लिए जुर्माने का प्रावधान शामिल है। जैसे बच्चों से संबंधित दायित्वों को पूरा न करने पर 200 करोड़ रुपए का जुर्माना। अगर डेटा ब्रीच होता है या कंपनियां पर्सनल डेटा को प्रोटेक्ट करने या डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड (DPB) और प्रभावित यूज़र्स को जानकारी देने मे असफल रहती हैं तो उन पर 250 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। तो डेटा से जुड़ा कानून लाना आज एक जरूरत है, क्योंकि इंटरनेट इस्तेमाल करना अब कोई शौक नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है और जब बात जरूरत की हो तो उसकी सुरक्षा भी बेहद जरूरी है।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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