'उड़ान' में कल्याणी सिंह का किरदार निभाकर कविता चौधरी घर-घर में हुईं थीं फेमस

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सिर्फ 30 एपिसोड में बनी उड़ान सीरीज को अपार सफलता मिली, इस सीरियल की कहानी एक ऐसी प्रेरणादायक आईपीएस ऑफिसर पर आधारित थी, जिसने तमाम मुश्किलों का सामना करके लिंग-भेद से भरे समाज में एक शक्तिशाली महिला के रूप में उभरीं.

कितने ही कम सीरियल होते हैं, जो असल जिन्दगी पर छाप छोड़ते हैं। साल था 1989, दूरदर्शन पर भी एक ऐसा ही सीरियल आता है, जिसकी कहानी न सिर्फ असली थी, बल्कि सेट भी असल था. सीरियल था उडान, इस सीरियल की कहानी लड़कियों के लिए काफी इन्पायरिंग थी. दरअसल, किरण के बाद देश की दूसरी आईपीएस ऑफिसर बनी कंचन चौधरी भट्टाचार्या की कहानी इस सीरियल के जरिए दिखाई गईं थी. जिसे पर्दे पर काबिले-ए-ताऱीफ तरीके से उतारा था उनकी छोटी बहन कविता चौधरी ने सीरियल में कंचन चौधरी का नाम कल्याणी सिंह था.

लेकिन कल्याणी सिंह का ये किरदार, कविता ने अपने नाम लिख लिया. अब वो हमारे बीच नहीं हैं, उनके फैंस को जैसे ही इसका पता चला, सोशल मीडिया पर लोगों में दुख जताया, किसी ने कहा कि अरे ये तो वो ही हैं उड़ान वाली. बचपन में इनका ये सीरियल देखते थे, तो सोचते थे कि हम भी ऐसे ही बनेंगे. तो किसी ने कहा कि बहुत बढ़िया सीरियल थी, तब मैं छोटा था, लेकिन अभी भी याद है, सिर्फ 30 एपिसोड में बनी उड़ान सीरीज को अपार सफलता मिली, इस सीरियल की कहानी एक ऐसी प्रेरणादायक आईपीएस ऑफिसर पर आधारित थी, जिसने तमाम मुश्किलों का सामना करके लिंग-भेद से भरे समाज में एक शक्तिशाली महिला के रूप में उभरीं. 

कविता चौधरी ने न सिर्फ उड़ान सीरियल को लिखा था, बल्कि उस किरदार को जीया भी था. दर्शक इस खूबसूरत और जज्बे से भरी नजर आने वाली अदाकारा के मुरीद हो गए थे. लगातार लिंग भेद का सामना करने के बाद भी कठिन रास्तों से गुजरकर IPS ऑफिसर बनकर कैसे माता-पिता को नाम रोशन किया और देश सेवा में जी-जान लगा दी, ये कहानी इस पर बेस्ड थी. खास बात तो ये थी कि कहानी, किरदार ही दमदार नहीं थे, शो के सेट को भी ओरिजिनल रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी. सड़क, घर से हरे-भरे मैदानों और पुलिस चौकियों तक, सब कुछ ओरिजिनल था.

वैसे साल 1980 में एक एड में उन्होंने बुद्धिमान गृहणी ललिता का किरदार भी निभाया था, जिसके बाद उनके फैंस उन्हें ललिता जी बुलाते थे. कविता नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अनंग देसाई, सतीश कौशिक, अनुपम खेर और गोविंद नामदेव की बैचमेट थीं। अनंग ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कविता को कुछ साल पहले कैंसर हुआ था। हालांकि, वो नहीं चाहती थीं कि लोगों को इसके बारे में पता चले। करीब 15 दिन पहले जब वो मुंबई में थीं, तब मैंने उनसे बात की थी। उस समय उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। कविता के भतीजे ने मुझे आज सुबह उनकी मौत के बारे में बताया. कविता का जन्म अमृतसर में ही हुआ था और जिंदगी का आखिरी सांस भी उन्होंने यहीं ली.

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